
"धनार्थिनो जनाः सर्वे रमन्तेऽस्मिन्नतीव यत् ।
अतो रत्नमिति प्रोक्तं शब्दशास्त्र विशारदैः ॥"
ज्या वस्तूंमध्ये धनवान होऊ इच्छिणा-यांचे मन कायम रमते त्यास रत्न असे म्हणतात. येथे धनवान ह्या शब्दाने आर्थिक आणि शारिरीक आरोग्य या दोन्ही अर्थी घेता येईल.
आयुर्वेदात रत्नांचे रत्न आणि उपरत्न असे दोन प्रकार वर्णन केलेले आहे. या दोहोंची भस्मे किंवा पिष्टी औषध म्हणुन वापरतात.
| क्र. | रत्न | इंग्रजी नाव | ग्रह |
|---|---|---|---|
| १ | माणिक्य (माणिक) | Ruby | सूर्य |
| २ | मुक्ताफल (मोती) | Pearl | चंद्र |
| ३ | विद्रुम (पोवळे) | Coral | मंगळ |
| ४ | तार्क्ष्य (पाचू) | Emerald | बुध |
| ५ | पुष्कराग (पुष्कराज) | Topaz | गुरू |
| ६ | भिदुर (हिरा) | Diamond | शुक्र |
| ७ | निलम | Sapphire | शनी |
| ८ | गोमेद | Zircon | राहू |
| ९ | विदुर (लसण्या) | Cat’s Eye | केतू |
| क्र. | उपरत्न | इंग्रजी नाव |
|---|---|---|
| १ | वैक्रान्त | Fluorspar |
| २ | सूर्यकान्त | Sunstone |
| ३ | चन्द्रकान्त | Moon Stone |
| ४ | राजावर्त | Lapisluzuli |
| ५ | पेरोज | Tarquoise |
| ६ | स्फटिक | Crystal |
| ७ | व्योमाश्म | Jade |
| ८ | पालङ्क | Onyx |
| ९ | पुत्तिका | Peridot / Olivine |
| क्र. | रत्न | औषधी गुण |
|---|---|---|
| १ | माणिक | भूक वाढविणारे, शुक्रवर्धक, कफवातशामक, बुद्धीवर्धक, बलवर्धक, आयुष्यवर्धक, क्षयनाशक |
| २ | मौक्तिक | शीत, कांतीवर्धक,नेत्रज्योतीवर्धक,भूक वाढविणारे,पुष्टीदायक, विषनाशक, वीर्यवर्धक,दाहनाशक |
| ३ | पोवळे | भूकवर्धक, पाचक, विषनाशक, क्षय-रक्तपित्त-खोकला नाशक |
| ४ | पाचू | ताप-उलटी-विषबाधा-दमा-मूळव्याध-पाण्डूरोग-सुज नाशक, बलवर्धक |
| ५ | पुष्कराज | उलटी-कफ-वाताचे रोग-दाह-त्वचारोग-रक्तविकार नाशक, भूकवर्धक, पाचक |
| ६ | हिरा | आयुष्यवर्धक, वात-पित्त-कफनाशक, रसायन, शुक्रवर्धक, हॄदयाला हितकर, अनेक रोगांचा नाशक |
| ७ | निलम | त्रिदोषनाशक, विषनाशक, बलवर्धक, त्वचाविकारनाशक, दमा-खोकला-ताप-मूळव्याध नाशक |
| ८ | गोमेद | कफ-पित्त नाशक, क्षयरोग-पाण्डूरोग-त्वचारोग नाशक, बुद्धीवर्धक, आमपाचक |
| ९ | लसण्या | पित्तशामक, थंड, बलवर्धक, नेत्रज्योतीवर्धक, रक्तपित्तनाशक |